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Showing posts from January, 2018

वाट पाहतोय मी त्या पहाटेची......

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"विचार करण्यास भाग पाडणारी एक उत्तम कविता     एका प्रकारे आरसाच दाखविला गेला "                                                           :शुभम चव्हाण ( वाचक),                         राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT),                         सुरत वाट पाहतोय मी त्या पहाटेची जेव्हा शेवट होईल काळोखाचा सर्व वाईट गोष्टी दूर सारून जगात जन्म होईल माणसाचा पोटासाठी जगतात प्राणी गत माणसाची पण तीच आहे दुसरा भुकेने मरत का नाही आमच्यात माणुसकीचीच कमी आहे स्वप्ने तर फार मोठी आहेत पण कष्ट करण्यास घाबरतो आमच्यात कोणी पुढे जात असेल तर त्याचे पण पाय खेचतो तुम्ही प्रगतीच काय सांगता आम्ही एका  चित्रपटासाठी  पण वाद घालतो जाती  आणि  प्रांत   पाहून...

अगले सेम पक्का फोड़ देंगे

  जम  के  करेंगे  पढाई  कोई  कसर  न  छोड़ेंगे  इस  सेमिस्टर  तो  भाई पक्का  फोड़  देंगे अब  तो  ठान  ली  है  मैंने की  थोड़ी  भी  देर  न  होगी इस  सेम  की  हर  असाइनमेंट  तो  टाइम  पे  सबमिट  होगी fb  व्हाट्सएप्प  ट्विटर  इंस्टा इनपे  टाइम  वेस्ट   न   करूँगा गोली  मारो   सोशल  मीडिया  को  खाली  समय  न्यूज़   ही  पढूंगा क्यों  करना  खाली  टाइमपास रात  को  जल्दी  सोने  जाऊंगा फिर  सुबह  जल्दी  उठके  gym  साला   सिक्स  पैक्स  बनाऊंगा  १०  दिन  चलेगा  नाटक  ये फिरसे  वही  चीज़े  दोहराएंगे एलर्जी  हमें  अच्छी  आदतों  से तो  क्या  ख़ाक...