एक आग





जिंदगी ने दिए है कई गम 
कई बार है हुई आँखें नम
उम्मीद सारी खो देता हूँ 
हौसला सारा हार जाता हूँ 
सोने जाऊ तो नींद नहीं है आती 
पुरानी यादें रातभर है सताती
पर कोई एक बात है 
जो मुझे कायम  रखती है 
वो बात नहीं भूल पाता
मेरे अंदरकी आग फिर सुलगती है 
एक आग ' कुछ कर दिखाने की '
एक आस ' सपने पूरा करने की '
गम में साथ ना छोड़े
वो अपने होते है 
गिर के भी ना टूटे
वही सच्चे सपने होते है .....!!!


                                        :-  मयूर लाभशेटवार


   
























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